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mahabharat 1.221.6: राजा युधिष्ठिर के द्वारा अन्य राजाओं की भी चंचल धनदेवी स्थिर हो गई, बुद्धि महान भक्ति से युक्त हो गई और सम्पूर्ण धर्म दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 1.221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.221.6 
अधिष्ठानवती लक्ष्मी: परायणवती मति:।
वर्धमानोऽखिलो धर्मस्तेनासीत् पृथिवीक्षिताम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजा युधिष्ठिर के द्वारा अन्य राजाओं की भी चंचल धनदेवी स्थिर हो गई, बुद्धि महान भक्ति से युक्त हो गई और सम्पूर्ण धर्म दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा ॥6॥
 
Through King Yudhishthir, the fickle goddess of wealth of other kings also became steady, the intellect became full of great devotion, and the complete religion started increasing day by day. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)