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mahabharat 1.221.5: प्रजा को महाराज युधिष्ठिर के रूप में ऐसा राजा मिला था, जो परम प्रभु का चिंतन करता था, बड़े-बड़े यज्ञों में वेदों का प्रयोग करता था और शुभ लोकों की रक्षा में तत्पर रहता था ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.221.5 
अध्येतारं परं वेदान् प्रयोक्तारं महाध्वरे।
रक्षितारं शुभाँल्लोकान् लेभिरे तं जनाधिपम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
प्रजा को महाराज युधिष्ठिर के रूप में ऐसा राजा मिला था, जो परम प्रभु का चिंतन करता था, बड़े-बड़े यज्ञों में वेदों का प्रयोग करता था और शुभ लोकों की रक्षा में तत्पर रहता था ॥5॥
 
The people had found such a king in the form of Maharaj Yudhishthir, who used to think about the Supreme Lord, used the Vedas in big yagyas and was ready to protect the auspicious worlds. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)