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mahabharat 1.221.4: इस प्रकार धर्म, अर्थ और काम ये तीनों पुरुषार्थ समान रूप से विभाजित होकर पृथ्वी पर मूर्तिमान होकर प्रकट हो रहे थे और राजा युधिष्ठिर मोक्षरूपी चौथे पुरुषार्थ के समान सुशोभित हो रहे थे॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.221.4 
तेषां समविभक्तानां क्षितौ देहवतामिव।
बभौ धर्मार्थकामानां चतुर्थ इव पार्थिव:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार धर्म, अर्थ और काम ये तीनों पुरुषार्थ समान रूप से विभाजित होकर पृथ्वी पर मूर्तिमान होकर प्रकट हो रहे थे और राजा युधिष्ठिर मोक्षरूपी चौथे पुरुषार्थ के समान सुशोभित हो रहे थे॥4॥
 
In this way, the three efforts of Dharma, Artha and Kama, divided equally, were appearing on the ground as if they were statues and King Yudhishthir was adorned like the fourth effort of salvation. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)