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mahabharat 1.221.32: वह प्रातःकालीन सूर्य के समान तेजस्वी प्रतीत हो रहा था। उसने फटे-पुराने वस्त्र पहने थे और सिर पर जटाएँ थीं। उसका मुख कमल की पंखुड़ी के समान सुन्दर लग रहा था। उसकी कांति लाल रंग की थी और वह अपनी प्रभा से दमक रहा था।   |   mahabharat अध्याय 1.221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.221.32 
तरुणादित्यसंकाशश्चीरवासा जटाधर:।
पद्मपत्रानन: पिङ्गस्तेजसा प्रज्वलन्निव॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वह प्रातःकालीन सूर्य के समान तेजस्वी प्रतीत हो रहा था। उसने फटे-पुराने वस्त्र पहने थे और सिर पर जटाएँ थीं। उसका मुख कमल की पंखुड़ी के समान सुन्दर लग रहा था। उसकी कांति लाल रंग की थी और वह अपनी प्रभा से दमक रहा था।
 
He appeared as radiant as the morning sun. He was dressed in rags and wore matted locks on his head. His face looked beautiful like a lotus petal. His radiance was of red colour and he seemed to be glowing with his brilliance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)