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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.221.17 
वैशम्पायन उवाच
आमन्त्र्य तौ धर्मराजमनुज्ञाप्य च भारत।
जग्मतु: पार्थगोविन्दौ सुहृज्जनवृतौ तत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं, 'भरत! यह सलाह देकर और युधिष्ठिर की अनुमति लेकर अर्जुन और श्रीकृष्ण अपने मित्रों के साथ वहाँ गये।
 
Vaishmpayana says, "Bharata! After giving this advice and taking Yudhishthira's permission, Arjuna and Shri Krishna went there with their friends.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)