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mahabharat 1.221.13: इस प्रकार सब पाण्डव अपने तेज से अन्य राजाओं को कष्ट देते हुए वहाँ निश्चिन्त होकर आनन्दपूर्वक रहने लगे ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.221.13 
तथा तु मुदिता: सर्वे पाण्डवा विगतज्वरा:।
अवसन् पृथिवीपालांस्तापयन्त: स्वतेजसा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सब पाण्डव अपने तेज से अन्य राजाओं को कष्ट देते हुए वहाँ निश्चिन्त होकर आनन्दपूर्वक रहने लगे ॥13॥
 
In this manner all the Pandavas, tormenting the other kings with their brilliance, lived there without any worries and in joy. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)