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mahabharat 1.221.12: भरतश्रेष्ठ! यशस्वी राजा युधिष्ठिर सदैव सुखपूर्वक अपना समय व्यतीत करते थे और अपना तथा सबका कल्याण करने का प्रयत्न करते थे। 12॥   |   mahabharat अध्याय 1.221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.221.12 
स हि सर्वस्य लोकस्य हितमात्मन एव च।
चिकीर्षन् सुमहातेजा रेमे भरतसत्तम॥ १२॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! यशस्वी राजा युधिष्ठिर सदैव सुखपूर्वक अपना समय व्यतीत करते थे और अपना तथा सबका कल्याण करने का प्रयत्न करते थे। 12॥
 
Bharatshrestha! The illustrious King Yudhishthir always spent his time happily, trying to do good for all people as well as for himself. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)