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mahabharat 1.221.11: सदा मधुर बोलने वाले बुद्धिमान कुन्तीनन्दन राजा युधिष्ठिर ने कभी अनुचित, मिथ्या, असह्य या अप्रिय बात नहीं कही॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 221: युधिष्ठिरके राज्यकी विशेषता, कृष्ण और अर्जुनका खाण्डववनमें जाना तथा उन दोनोंके पास ब्राह्मणवेशधारी अग्निदेवका आगमन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.221.11 
न ह्ययुक्तं न चासत्यं नासह्यं न च वाप्रियम्।
भाषितं चारुभाषस्य जज्ञे पार्थस्य धीमत:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
सदा मधुर बोलने वाले बुद्धिमान कुन्तीनन्दन राजा युधिष्ठिर ने कभी अनुचित, मिथ्या, असह्य या अप्रिय बात नहीं कही॥11॥
 
King Yudhishthira, the wise Kuntinandan who always spoke sweetly, never said anything inappropriate, false, unbearable or unpleasant. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)