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mahabharat 1.220.87: हे भरतश्रेष्ठ! पुरोहित धौम्य ने सब बालकों का एक-एक करके जातकर्म, चूड़ाकरण और उपनयन संस्कार विधिपूर्वक सम्पन्न किया।   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  1.220.87 
जातकर्माण्यानुपूर्व्याच्चूडोपनयनानि च।
चकार विधिवद् धौम्यस्तेषां भरतसत्तम॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! पुरोहित धौम्य ने सब बालकों का एक-एक करके जातकर्म, चूड़ाकरण और उपनयन संस्कार विधिपूर्वक सम्पन्न किया।
 
O best of the Bharatas! The priest Dhoumya performed the rites of Jaatkarma, Chudakaran and Upanayana for all the boys one by one in a proper manner. 87.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)