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mahabharat 1.220.82: भीमसेन द्वारा सहस्र सोमयाग करने के बाद द्रौपदी ने सोम और सूर्य के समान तेजस्वी एक महान धनुर्धर पुत्र को जन्म दिया, इसलिये उसका नाम सुतसोम रखा गया। 82॥   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  1.220.82 
सुते सोमसहस्रे तु सोमार्कसमतेजसम्।
सुतसोमं महेष्वासं सुषुवे भीमसेनत:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन द्वारा सहस्र सोमयाग करने के बाद द्रौपदी ने सोम और सूर्य के समान तेजस्वी एक महान धनुर्धर पुत्र को जन्म दिया, इसलिये उसका नाम सुतसोम रखा गया। 82॥
 
After Bhimsen performed Sahasra Somayag, Draupadi gave birth to a great archer son as bright as Som and Surya, hence he was named Sutasom. 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)