Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.220.81: ब्राह्मणों ने युधिष्ठिर से कहा कि शास्त्रानुसार उनके पुत्र का नाम प्रतिविन्ध्य होना चाहिए। उनका आशय यह था कि वह प्रहारों से होने वाली पीड़ा को जानने में विंध्य पर्वत के समान हो। (शत्रुओं के प्रहारों से उसे किंचितमात्र भी पीड़ा न हो)॥81॥ | mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मणों ने युधिष्ठिर से कहा कि शास्त्रानुसार उनके पुत्र का नाम प्रतिविन्ध्य होना चाहिए। उनका आशय यह था कि वह प्रहारों से होने वाली पीड़ा को जानने में विंध्य पर्वत के समान हो। (शत्रुओं के प्रहारों से उसे किंचितमात्र भी पीड़ा न हो)॥81॥
The Brahmins told Yudhishthira that his son's name should be Prativindhya according to the scriptures. Their intention was that he should be like the Vindhya mountain in the knowledge of pain caused by attacks. (He should not feel even a little pain from the attacks of enemies)॥ 81॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥