vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा
»
श्लोक 77
श्लोक
1.220.77
कृष्णस्य सदृशं शौर्ये वीर्ये रूपे तथाऽऽकृतौ।
ददर्श पुत्रं बीभत्सुर्मघवानिव तं यथा॥ ७७॥
अनुवाद
वह हर तरह से श्री कृष्ण जैसा ही लग रहा था - वीरता, पराक्रम, सौंदर्य और रूप। अर्जुन ने अपने पुत्र को उसी प्रसन्नता से देखा जैसे इंद्र ने उसे देखा था।
He looked like Shri Krishna in all aspects - valour, bravery, beauty and form. Arjuna looked at his son with the same delight as Indra looked at him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×