श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  1.220.77 
कृष्णस्य सदृशं शौर्ये वीर्ये रूपे तथाऽऽकृतौ।
ददर्श पुत्रं बीभत्सुर्मघवानिव तं यथा॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
वह हर तरह से श्री कृष्ण जैसा ही लग रहा था - वीरता, पराक्रम, सौंदर्य और रूप। अर्जुन ने अपने पुत्र को उसी प्रसन्नता से देखा जैसे इंद्र ने उसे देखा था।
 
He looked like Shri Krishna in all aspects - valour, bravery, beauty and form. Arjuna looked at his son with the same delight as Indra looked at him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)