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mahabharat 1.220.75: वह सभी गुणों से संपन्न था, जिससे लोग उससे घृणा करते थे, वह सभी सद्गुणों से सुशोभित था और भयंकर था। उसके कंधे बैल के समान दृढ़ थे और मुँह खोले हुए साँप के समान वह अपने शत्रुओं को भयभीत करने वाला प्रतीत होता था। 75.   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.220.75 
सर्वसंहननोपेतं सर्वलक्षणलक्षितम्।
दुर्धर्षमृषभस्कन्धं व्यात्ताननमिवोरगम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
वह सभी गुणों से संपन्न था, जिससे लोग उससे घृणा करते थे, वह सभी सद्गुणों से सुशोभित था और भयंकर था। उसके कंधे बैल के समान दृढ़ थे और मुँह खोले हुए साँप के समान वह अपने शत्रुओं को भयभीत करने वाला प्रतीत होता था। 75.
 
He was endowed with all the good qualities that made others despise him, adorned with all the good characteristics and was fierce. His shoulders were as robust as a bull and like a snake with its mouth wide open, he appeared terrifying to his enemies. 75.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)