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mahabharat 1.220.72: वेदों का ज्ञान प्राप्त करके शत्रुओं का नाश करने वाले उस बालक ने अपने पिता अर्जुन से चार पादों और दस अंगों वाले, दैवी तथा मानवीय, सभी प्रकार के धनुर्वेदों का ज्ञान प्राप्त किया।   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  1.220.72 
चतुष्पादं दशविधं धनुर्वेदमरिंदम:।
अर्जुनाद् वेद वेदज्ञ: सकलं दिव्यमानुषम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
वेदों का ज्ञान प्राप्त करके शत्रुओं का नाश करने वाले उस बालक ने अपने पिता अर्जुन से चार पादों और दस अंगों वाले, दैवी तथा मानवीय, सभी प्रकार के धनुर्वेदों का ज्ञान प्राप्त किया।
 
Having acquired the knowledge of the Vedas, that child, who destroyed the enemies, learnt from his father Arjun the knowledge of all types of Dhanurveda, consisting of four padas (verses) and ten parts (parts), both divine and human.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)