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mahabharat 1.220.71: श्रीकृष्ण ने जन्म से ही उसके पालन-पोषण की सुन्दर व्यवस्था की थी। बालक अभिमन्यु शुक्ल पक्ष के चन्द्रमा के समान दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा ॥71॥   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  1.220.71 
जन्मप्रभृति कृष्णश्च चक्रे तस्य क्रिया: शुभा:।
स चापि ववृधे बाल: शुक्लपक्षे यथा शशी॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण ने जन्म से ही उसके पालन-पोषण की सुन्दर व्यवस्था की थी। बालक अभिमन्यु शुक्ल पक्ष के चन्द्रमा के समान दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा ॥71॥
 
Shri Krishna had made beautiful arrangements for his upbringing since birth. Child Abhimanyu started growing day by day like the moon of Shukla Paksha. 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)