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mahabharat 1.220.68: जैसे यज्ञ में मंथन करने पर शमी के गर्भ से उत्पन्न अश्वत्थ से अग्नि प्रकट होती है, उसी प्रकार अर्जुन के द्वारा सुभद्रा के गर्भ से अतिरथी वीर उत्पन्न हुआ ॥68॥   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  1.220.68 
स सात्वत्यामतिरथ: सम्बभूव धनंजयात्।
मखे निर्मथनेनेव शमीगर्भाद्‍धुताशन:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
जैसे यज्ञ में मंथन करने पर शमी के गर्भ से उत्पन्न अश्वत्थ से अग्नि प्रकट होती है, उसी प्रकार अर्जुन के द्वारा सुभद्रा के गर्भ से अतिरथी वीर उत्पन्न हुआ ॥68॥
 
Just as fire appears from the ashvattha born from the womb of Shami when churned in a yagya, in the same way that Atirathi Veera was born from the womb of Subhadra through Arjun. 68॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)