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mahabharat 1.220.63: जनमेजय! परन्तु भगवान वासुदेव सुन्दर इन्द्रप्रस्थ में महात्मा अर्जुन के साथ रहे। 63॥   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  1.220.63 
वासुदेवस्तु पार्थेन तत्रैव सह भारत।
उवास नगरे रम्ये शक्रप्रस्थे महात्मना॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! परन्तु भगवान वासुदेव सुन्दर इन्द्रप्रस्थ में महात्मा अर्जुन के साथ रहे। 63॥
 
Janamejaya! But Lord Vasudev stayed with Mahatma Arjun in the beautiful Indraprastha. 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)