श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  1.220.61 
एवमुत्तमवीर्यास्ते विहृत्य दिवसान् बहून्।
पूजिता: कुरुभिर्जग्मु: पुनर्द्वारवतीं प्रति॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वह महान एवं पराक्रमी यदुवंशी बहुत समय तक इन्द्रप्रस्थ में रहकर कौरवों द्वारा सम्मानित होकर द्वारका चला गया।
 
In this manner, that great and valiant Yaduvanshi, after staying for a long time in Indraprastha, was honoured by the Kauravas and then went to Dwaraka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)