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mahabharat 1.220.60: कौरव और वृष्णिवंश के वीर अपनी-अपनी रुचि के अनुसार विचरण करने लगे, वीणा की सुन्दर ध्वनि के साथ गाते-बजाते तथा इधर-उधर संगीत का आनन्द लेते हुए।   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  1.220.60 
तत्र तत्र महानादैरुत्कृष्टतलनादितै:।
यथायोगं यथाप्रीति विजह्रु: कुरुवृष्णय:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
कौरव और वृष्णिवंश के वीर अपनी-अपनी रुचि के अनुसार विचरण करने लगे, वीणा की सुन्दर ध्वनि के साथ गाते-बजाते तथा इधर-उधर संगीत का आनन्द लेते हुए।
 
The Kauravas and the heroes of the Vrishni clan began to wander about according to their interests, singing and playing to the beautiful sound of the Veena and enjoying music here and there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)