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mahabharat 1.220.58: धर्मराज युधिष्ठिर ने वह सारा धन स्वीकार कर लिया और वृष्णि तथा अंधक वंश के उन सभी पराक्रमी योद्धाओं का बहुत अच्छा सत्कार किया ॥58॥   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  1.220.58 
प्रतिजग्राह तत् सर्वं धर्मराजो युधिष्ठिर:।
पूजयामास तांश्चैव वृष्ण्यन्धकमहारथान्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज युधिष्ठिर ने वह सारा धन स्वीकार कर लिया और वृष्णि तथा अंधक वंश के उन सभी पराक्रमी योद्धाओं का बहुत अच्छा सत्कार किया ॥58॥
 
Dharmaraja Yudhishthira accepted all that wealth and honoured all those mighty warriors from the Vrishni and Andhaka clans very well. ॥58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)