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mahabharat 1.220.52: दशरथवंश के रत्न भगवान श्रीकृष्ण ने दस तौले नकली सोने (मोहरें) और अग्नि के समान चमकने वाले नकली सोने (डली) भेंट किए ॥52॥   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  1.220.52 
कृताकृतस्य मुख्यस्य कनकस्याग्निवर्चस:।
मनुष्यभारान् दाशार्हो ददौ दश जनार्दन:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
दशरथवंश के रत्न भगवान श्रीकृष्ण ने दस तौले नकली सोने (मोहरें) और अग्नि के समान चमकने वाले नकली सोने (डली) भेंट किए ॥52॥
 
Lord Shri Krishna, the gem of Dasharhvansh, gifted ten weights of artificial gold (stamps) and artificial gold (nuggets) shining like fire. 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)