श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  1.220.51 
पृष्ठॺानामपि चाश्वानां बाह्लिकानां जनार्दन:।
ददौ शतसहस्राख्यं कन्याधनमनुत्तमम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन ने उत्तम दहेज में बाह्लीक देश से एक लाख घोड़े दिए, जो सवारों को अपनी पीठ पर लादकर ले जाने के काम आते थे ॥ 51॥
 
Janardana gave as an excellent dowry one hundred thousand horses from the country of Bahlika, which were used for carrying riders on their backs. ॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)