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mahabharat 1.220.47: जनार्दन ने प्रेमपूर्वक सोने से सजी, चन्द्रमा के समान श्वेत आभा वाली एक हजार शुद्ध नस्ल की घोड़ियाँ भी भेंट कीं।   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.220.47 
वडवानां च शुद्धानां चन्द्रांशुसमवर्चसाम्।
ददौ जनार्दन: प्रीत्या सहस्रं हेमभूषितम्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन ने प्रेमपूर्वक सोने से सजी, चन्द्रमा के समान श्वेत आभा वाली एक हजार शुद्ध नस्ल की घोड़ियाँ भी भेंट कीं।
 
Janardana also lovingly presented one thousand purebred mares adorned with gold, having a moon-like white luster.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)