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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 45-46
 
 
श्लोक  1.220.45-46 
रथानां काञ्चनाङ्गानां किङ्किणीजालमालिनाम्।
चतुर्युजामुपेतानां सूतै: कुशलशिक्षितै:॥ ४५॥
सहस्रं प्रददौ कृष्णो गवामयुतमेव च।
श्रीमान् माथुरदेश्यानां दोग्ध्रीणां पुण्यवर्चसाम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण ने किंकणी और झालरों से सुसज्जित एक हज़ार स्वर्ण रथ समर्पित किए, जिनमें से प्रत्येक को चार घोड़े खींचते थे और प्रत्येक पर एक चतुर और प्रशिक्षित सारथी था। उन्होंने मथुरा क्षेत्र की पवित्र कांति वाली दस हज़ार दुधारू गायें भी दीं।
 
One thousand golden chariots decorated with kinkinis and fringes, each drawn by four horses and each with a clever and trained charioteer, were dedicated by Shri Krishna. He also gave ten thousand milch cows of the sacred brilliance of the Mathura region.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)