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mahabharat 1.220.44: परम तेजस्वी भगवान कृष्ण ने वर-वधू के परिवार को उत्तम धन-संपत्ति प्रदान की। वर पक्ष को जो दहेज दिया जाना था, वह पहले नहीं दिया गया था, और इस बार उन्होंने उसे पूरा किया।   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.220.44 
तेषां ददौ हृषीकेशो जन्यार्थे धनमुत्तमम्।
हरणं वै सुभद्राया ज्ञातिदेयं महायशा:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
परम तेजस्वी भगवान कृष्ण ने वर-वधू के परिवार को उत्तम धन-संपत्ति प्रदान की। वर पक्ष को जो दहेज दिया जाना था, वह पहले नहीं दिया गया था, और इस बार उन्होंने उसे पूरा किया।
 
The highly illustrious Lord Krishna offered the best of wealth to the bride and the groom's family. The dowry that was due to be given to the groom's family had not been given earlier, and this time He fulfilled it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)