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mahabharat 1.220.23-24: उस समय द्रौपदी ने तुरन्त उठकर श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा को गले लगा लिया और बड़े हर्ष से बोली- ‘बहन! आपके पति शत्रुओं से मुक्त हों।’ सुभद्रा ने भी हर्ष से कहा- ‘बहन! ऐसा ही हो।’   |   mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  1.220.23-24 
प्रत्युत्थाय तदा कृष्णा स्वसारं माधवस्य च॥ २३॥
परिष्वज्यावदत् प्रीत्या नि:सपत्नोऽस्तु ते पति:।
तथैव मुदिता भद्रा तामुवाचैवमस्त्विति॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उस समय द्रौपदी ने तुरन्त उठकर श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा को गले लगा लिया और बड़े हर्ष से बोली- ‘बहन! आपके पति शत्रुओं से मुक्त हों।’ सुभद्रा ने भी हर्ष से कहा- ‘बहन! ऐसा ही हो।’
 
At that time Draupadi immediately stood up and hugged Shri Krishna's sister Subhadra and said with great joy - 'Sister! May your husband be free from enemies.' Subhadra also said with joy - 'Sister! May it be so.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)