Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.220.22-23h: और बड़ी प्रसन्नता के साथ उन्होंने उस अनुपम वधू को अनेक आशीर्वाद दिए। तत्पश्चात पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर मुख वाली सुभद्रा ने तुरन्त जाकर महारानी द्रौपदी के चरण स्पर्श किए और कहा - 'देवि! मैं आपकी दासी हूँ।' | mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
और बड़ी प्रसन्नता के साथ उन्होंने उस अनुपम वधू को अनेक आशीर्वाद दिए। तत्पश्चात पूर्ण चन्द्रमा के समान सुन्दर मुख वाली सुभद्रा ने तुरन्त जाकर महारानी द्रौपदी के चरण स्पर्श किए और कहा - 'देवि! मैं आपकी दासी हूँ।'
And with great pleasure he gave many blessings to that matchless bride. Thereafter Subhadra with a face as beautiful as the full moon immediately went and touched the feet of Queen Draupadi and said - 'Devi! I am your maid'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥