Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.220.16-17: द्रौपदी ने प्रेमवश कुरुपुत्र अर्जुन से कहा - 'कुन्तीकुमार! तुम यहाँ क्यों आये हो? उस स्थान पर जाओ जहाँ सात्वत कुल की वह कन्या सुभद्रा रहती है। यह सत्य है कि बोझ चाहे कितना ही कसकर बाँधा जाए, दूसरी बार बाँधने पर पहला बंधन ढीला हो जाता है (यही तुम्हारे मेरे प्रति प्रेम की स्थिति है)॥ 16-17॥ | mahabharat अध्याय 1.220: द्वारकामें अर्जुन और सुभद्राका विवाह, अर्जुनके इन्द्रप्रस्थ पहुँचनेपर श्रीकृष्ण आदिका दहेज लेकर वहाँ जाना, द्रौपदीके पुत्र एवं अभिमन्युके जन्म, संस्कार और शिक्षा । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रौपदी ने प्रेमवश कुरुपुत्र अर्जुन से कहा - 'कुन्तीकुमार! तुम यहाँ क्यों आये हो? उस स्थान पर जाओ जहाँ सात्वत कुल की वह कन्या सुभद्रा रहती है। यह सत्य है कि बोझ चाहे कितना ही कसकर बाँधा जाए, दूसरी बार बाँधने पर पहला बंधन ढीला हो जाता है (यही तुम्हारे मेरे प्रति प्रेम की स्थिति है)॥ 16-17॥
Draupadi, out of love, said to Arjuna, son of Kuru - 'Kuntikumar! Why have you come here? Go to the place where that girl Subhadra of the Satvat clan lives. It is true that no matter how tightly a burden is tied, when it is tied a second time, the first tie becomes loose (this is the condition of your love for me).॥ 16-17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥