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mahabharat 1.219.31: अर्जुन का यह अन्याय मेरे लिए असह्य है। आज मैं ही इस पृथ्वी को कुरुवंश से मुक्त कर दूँगा।॥31॥   |   mahabharat अध्याय 1.219: यादवोंकी युद्धके लिये तैयारी और अर्जुनके प्रति बलरामजीके क्रोधपूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 219: यादवोंकी युद्धके लिये तैयारी और अर्जुनके प्रति बलरामजीके क्रोधपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.219.31 
अद्य निष्कौरवामेक: करिष्यामि वसुंधराम्।
न हि मे मर्षणीयोऽयमर्जुनस्य व्यतिक्रम:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन का यह अन्याय मेरे लिए असह्य है। आज मैं ही इस पृथ्वी को कुरुवंश से मुक्त कर दूँगा।॥31॥
 
'This injustice of Arjuna is intolerable for me. Today I alone will make this earth free of the Kuru dynasty.'॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)