Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.219.3-5: (दारुक ने प्रभु की आज्ञा से) अपने स्वर्णमय रथ को विधिपूर्वक सजाया था। उसमें छोटी-छोटी घंटियाँ और झालरें लगाई थीं तथा शैब्य, सुग्रीव आदि घोड़ों को भी जोता था। उस रथ में सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र विद्यमान थे। उसकी गड़गड़ाहट बादलों की गर्जना के समान थी। वह प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी प्रतीत हो रहा था। उसे देखकर ही शत्रु भयभीत हो जाते थे। पुरुषश्रेष्ठ धनंजय कवच, तलवार और हाथों में दस्ताने पहनकर उसी रथ पर सवार होकर आखेट के बहाने रैवतक पर्वत पर गए। 3-5। | mahabharat अध्याय 1.219: यादवोंकी युद्धके लिये तैयारी और अर्जुनके प्रति बलरामजीके क्रोधपूर्ण उद्गार । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(दारुक ने प्रभु की आज्ञा से) अपने स्वर्णमय रथ को विधिपूर्वक सजाया था। उसमें छोटी-छोटी घंटियाँ और झालरें लगाई थीं तथा शैब्य, सुग्रीव आदि घोड़ों को भी जोता था। उस रथ में सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र विद्यमान थे। उसकी गड़गड़ाहट बादलों की गर्जना के समान थी। वह प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी प्रतीत हो रहा था। उसे देखकर ही शत्रु भयभीत हो जाते थे। पुरुषश्रेष्ठ धनंजय कवच, तलवार और हाथों में दस्ताने पहनकर उसी रथ पर सवार होकर आखेट के बहाने रैवतक पर्वत पर गए। 3-5।
(Daruk, by the Lord's order) had decorated his golden chariot according to the rituals. He had put small bells and fringes in it and had also harnessed horses like Shaibya, Sugreeva etc. All kinds of weapons were present in that chariot. Its rumbling sound was like the roar of the clouds. It appeared as brilliant as a blazing fire. The enemies were horrified just by seeing it. The best of men Dhananjay, wearing armour and sword and gloves on his hands, went to the Raivataka mountain in the same chariot on the pretext of hunting. 3-5.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥