Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.219.27: 'ऐसा कौन पुरुष है जो अपने को महान समझता है, जो जिस पात्र में खाता है, उसे छेद देता है?॥27॥   |   mahabharat अध्याय 1.219: यादवोंकी युद्धके लिये तैयारी और अर्जुनके प्रति बलरामजीके क्रोधपूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 219: यादवोंकी युद्धके लिये तैयारी और अर्जुनके प्रति बलरामजीके क्रोधपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.219.27 
को हि तत्रैव भुक्त्वान्नं भाजनं भेत्तुमर्हति।
मन्यमान: कुले जातमात्मानं पुरुष: क्वचित्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
'ऐसा कौन पुरुष है जो अपने को महान समझता है, जो जिस पात्र में खाता है, उसे छेद देता है?॥27॥
 
'Who is the man who considers himself to be of high standing, who would pierce the vessel in which he eats?॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)