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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 219: यादवोंकी युद्धके लिये तैयारी और अर्जुनके प्रति बलरामजीके क्रोधपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.219.26 
सत्कृतस्त्वत्कृते पार्थ: सर्वैरस्माभिरच्युत।
न च सोऽर्हति तां पूजां दुर्बुद्धि: कुलपांसन:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
'अच्युत! आपकी संतुष्टि के लिए हम सबने अर्जुन का इतना सम्मान किया, किन्तु वह मूर्ख व्यक्ति उस सम्मान के योग्य कदापि नहीं था।
 
'Achyuta! For your satisfaction we all honoured Arjuna so much, but that foolish person was never worthy of that honour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)