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mahabharat 1.219.21: 'मूर्खों! श्रीकृष्ण चुपचाप बैठे हैं, तुम क्या कर रहे हो? उनका अभिप्राय जाने बिना ही तुम इतने क्रोधित हो गए हो। तुम्हारा यह दहाड़ना व्यर्थ है॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 1.219: यादवोंकी युद्धके लिये तैयारी और अर्जुनके प्रति बलरामजीके क्रोधपूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 219: यादवोंकी युद्धके लिये तैयारी और अर्जुनके प्रति बलरामजीके क्रोधपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.219.21 
किमिदं कुरुथाप्रज्ञास्तूष्णींभूते जनार्दने।
अस्य भावमविज्ञाय संक्रुद्धा मोघगर्जिता:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'मूर्खों! श्रीकृष्ण चुपचाप बैठे हैं, तुम क्या कर रहे हो? उनका अभिप्राय जाने बिना ही तुम इतने क्रोधित हो गए हो। तुम्हारा यह दहाड़ना व्यर्थ है॥ 21॥
 
‘Fools! Shri Krishna is sitting quietly, what are you doing? You have become so angry without knowing his intention. This roar of yours is useless.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)