श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 219: यादवोंकी युद्धके लिये तैयारी और अर्जुनके प्रति बलरामजीके क्रोधपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.219.16 
तच्छ्रुत्वा वृष्णिवीरास्ते मदसंरक्तलोचना:।
अमृष्यमाणा: पार्थस्य समुत्पेतुरहंकृता:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर युद्ध के लिए क्रोध से भरे हुए लाल नेत्रों वाले वृष्णिवंशी योद्धा अर्जुन के प्रति द्वेष से भर गए और गर्व से उछल पड़े॥16॥
 
On hearing this, the warriors of Vrishni dynasty with red eyes filled with rage for war were filled with hatred towards Arjun and jumped with pride. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)