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mahabharat 1.219.1-2: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तदनन्तर उस विवाह-सम्बन्धी संदेश पर युधिष्ठिर की अनुमति पाकर जब धनंजय को यह ज्ञात हुआ कि सुभद्रा रैवतक पर्वत पर चली गई है, तब उसने भगवान् श्रीकृष्ण से परामर्श किया। आगे क्या करना है, यह बताकर श्रीकृष्ण ने उसे सुभद्रा से विवाह करके उसे ले जाने की अनुमति दे दी। श्रीकृष्ण की सलाह पाकर भरतश्रेष्ठ अर्जुन अपने विश्रामस्थान को चले गए। 1-2॥   |   mahabharat अध्याय 1.219: यादवोंकी युद्धके लिये तैयारी और अर्जुनके प्रति बलरामजीके क्रोधपूर्ण उद्‍गार   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 219: यादवोंकी युद्धके लिये तैयारी और अर्जुनके प्रति बलरामजीके क्रोधपूर्ण उद्‍गार  »  श्लोक 1-2
 
 
श्लोक  1.219.1-2 
वैशम्पायन उवाच
तत: संवादिते तस्मिन्ननुज्ञातो धनंजय:।
गतां रैवतके कन्यां विदित्वा जनमेजय॥ १॥
वासुदेवाभ्यनुज्ञात: कथयित्वेतिकृत्यताम्।
कृष्णस्य मतमादाय प्रययौ भरतर्षभ:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तदनन्तर उस विवाह-सम्बन्धी संदेश पर युधिष्ठिर की अनुमति पाकर जब धनंजय को यह ज्ञात हुआ कि सुभद्रा रैवतक पर्वत पर चली गई है, तब उसने भगवान् श्रीकृष्ण से परामर्श किया। आगे क्या करना है, यह बताकर श्रीकृष्ण ने उसे सुभद्रा से विवाह करके उसे ले जाने की अनुमति दे दी। श्रीकृष्ण की सलाह पाकर भरतश्रेष्ठ अर्जुन अपने विश्रामस्थान को चले गए। 1-2॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Subsequently, after getting Yudhishthira's permission on that marriage related message, when Dhananjay came to know that Subhadra had gone to Raivatak mountain, he consulted Lord Shri Krishna. After telling him what to do next, Shri Krishna gave him permission to marry Subhadra and take her away. After getting the advice of Shri Krishna, Arjun, the best of Bharat, went to his resting place. 1-2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)