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तथैव राजा वृष्णीनामुग्रसेन: प्रतापवान्।
अनुगीयमानो गन्धर्वै: स्त्रीसहस्रसहायवान्॥ ८॥
अनुवाद
वृष्णिवंश के पराक्रमी राजा उग्रसेन भी वहाँ रमण कर रहे थे। उनके पास अनेक गंधर्व गान कर रहे थे और हजारों स्त्रियाँ उनकी सेवा कर रही थीं।
The mighty king of the Vrishni clan, Ugrasen, was also enjoying himself there. Many Gandharvas were singing near him and thousands of women were serving him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥