Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.218.21: भगवान श्रीकृष्ण बोले - हे पुरुषश्रेष्ठ पार्थ! स्वयंवर क्षत्रियों के लिए एक प्रकार का विवाह है, किन्तु इसका फल संदिग्ध है, क्योंकि स्त्रियाँ स्वभाव से ही अनिश्चित होती हैं (यह ज्ञात नहीं होता कि वे स्वयंवर में किसे चुनेंगी)। | mahabharat अध्याय 1.218: रैवतक पर्वतके उत्सवमें अर्जुनका सुभद्रापर आसक्त होना और श्रीकृष्ण तथा युधिष्ठिरकी अनुमतिसे उसे हर ले जानेका निश्चय करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वासुदेव उवाच
स्वयंवर: क्षत्रियाणां विवाह: पुरुषर्षभ।
स च संशयित: पार्थ स्वभावस्यानिमित्तत:॥ २१॥
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण बोले - हे पुरुषश्रेष्ठ पार्थ! स्वयंवर क्षत्रियों के लिए एक प्रकार का विवाह है, किन्तु इसका फल संदिग्ध है, क्योंकि स्त्रियाँ स्वभाव से ही अनिश्चित होती हैं (यह ज्ञात नहीं होता कि वे स्वयंवर में किसे चुनेंगी)।
Lord Krishna said - O best of men, Partha! Swayamvara is one type of marriage for Kshatriyas, but its result is doubtful because women are by nature uncertain (it is not known whom they will choose in the swayamvara).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥