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mahabharat 1.218.16: तब भगवान् हँसकर बोले - 'भारत! यह क्या है? क्या वनवासी का मन भी इस प्रकार काम से उन्मत्त हो रहा है?॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.218: रैवतक पर्वतके उत्सवमें अर्जुनका सुभद्रापर आसक्त होना और श्रीकृष्ण तथा युधिष्ठिरकी अनुमतिसे उसे हर ले जानेका निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 218: रैवतक पर्वतके उत्सवमें अर्जुनका सुभद्रापर आसक्त होना और श्रीकृष्ण तथा युधिष्ठिरकी अनुमतिसे उसे हर ले जानेका निश्चय करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.218.16 
अब्रवीत् पुरुषव्याघ्र: प्रहसन्निव भारत।
वनेचरस्य किमिदं कामेनालोडॺते मन:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान् हँसकर बोले - 'भारत! यह क्या है? क्या वनवासी का मन भी इस प्रकार काम से उन्मत्त हो रहा है?॥16॥
 
Then the Supreme Being laughed and said, 'Bharat! What is this, is the mind of a forest dweller also being driven mad by lust in this manner?॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)