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mahabharat 1.218.10-12: अक्रूर, सारण, गद, बभ्रु, विदुरथ, निषथ, चारुदेष्ण, पृथु, विपृथु, सत्यक, सात्यकि, भंगकार, मारव, हृदयिकपुत्र कृतवर्मा, उद्धव और अन्य यदुवंशी, वे सभी अलग-अलग महिलाओं और गंधर्वों से घिरे हुए थे। रैवतक पर्वत पर उस उत्सव की शोभा बढ़ रही थी॥10-12॥   |   mahabharat अध्याय 1.218: रैवतक पर्वतके उत्सवमें अर्जुनका सुभद्रापर आसक्त होना और श्रीकृष्ण तथा युधिष्ठिरकी अनुमतिसे उसे हर ले जानेका निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 218: रैवतक पर्वतके उत्सवमें अर्जुनका सुभद्रापर आसक्त होना और श्रीकृष्ण तथा युधिष्ठिरकी अनुमतिसे उसे हर ले जानेका निश्चय करना  »  श्लोक 10-12
 
 
श्लोक  1.218.10-12 
अक्रूर: सारणश्चैव गदो बभ्रुर्विदूरथ:।
निशठश्चारुदेष्णश्च पृथुर्विपृथुरेव च॥ १०॥
सत्यक: सात्यकिश्चैव भङ्गकारमहारवौ।
हार्दिक्य उद्धवश्चैव ये चान्ये नानुकीर्तिता:॥ ११॥
एते परिवृता: स्त्रीभिर्गन्धर्वैश्च पृथक् पृथक्।
तमुत्सवं रैवतके शोभयाञ्चक्रिरे तदा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अक्रूर, सारण, गद, बभ्रु, विदुरथ, निषथ, चारुदेष्ण, पृथु, विपृथु, सत्यक, सात्यकि, भंगकार, मारव, हृदयिकपुत्र कृतवर्मा, उद्धव और अन्य यदुवंशी, वे सभी अलग-अलग महिलाओं और गंधर्वों से घिरे हुए थे। रैवतक पर्वत पर उस उत्सव की शोभा बढ़ रही थी॥10-12॥
 
Akrūra, Sārān, Gad, Bābhru, Vidūratha, Nīśath, Cārudeshna, Pṛthu, Vipṛthu, Satyak, Satyaki, Bhangākāra, Mārava, Hṛdikputra Kritavarmā, Uddhava and other Yaduvanshis, all of them surrounded by different women and Gandharvas, were adding to the beauty of that festival on the Raivataka mountain.॥10-12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)