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mahabharat 1.217.5: उन दोनों को हृदय से लगाकर और उनसे उत्तम प्रश्न पूछकर उनके परस्पर प्रिय मित्र नर-नारायण ऋषि वन में एक स्थान पर बैठ गए॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.217: अर्जुनका प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णसे मिलना और उन्हींके साथ उनका रैवतक पर्वत एवं द्वारकापुरीमें आना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 217: अर्जुनका प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णसे मिलना और उन्हींके साथ उनका रैवतक पर्वत एवं द्वारकापुरीमें आना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.217.5 
तावन्योन्यं समाश्लिष्य पृष्ट्वा च कुशलं वने।
आस्तां प्रियसखायौ तौ नरनारायणावृषी॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों को हृदय से लगाकर और उनसे उत्तम प्रश्न पूछकर उनके परस्पर प्रिय मित्र नर-नारायण ऋषि वन में एक स्थान पर बैठ गए॥5॥
 
After hugging both of them heartily and asking them good questions, their mutual dear friends, Nar-Narayan Rishi, sat down at a place in the forest. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)