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mahabharat 1.217.16: हे जनमेजय! उस समय कुन्तीपुत्र के स्वागत के लिए सम्पूर्ण द्वारकापुरी सजाई गई थी, यहाँ तक कि वहाँ के घरों के बगीचे भी सजाए गए थे।   |   mahabharat अध्याय 1.217: अर्जुनका प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णसे मिलना और उन्हींके साथ उनका रैवतक पर्वत एवं द्वारकापुरीमें आना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.217.16 
अलंकृता द्वारका तु बभूव जनमेजय।
कुन्तीपुत्रस्य पूजार्थमपि निष्कुटकेष्वपि॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे जनमेजय! उस समय कुन्तीपुत्र के स्वागत के लिए सम्पूर्ण द्वारकापुरी सजाई गई थी, यहाँ तक कि वहाँ के घरों के बगीचे भी सजाए गए थे।
 
O Janamejaya! At that time the entire Dwarakapuri was decorated to welcome Kunti's son and even the gardens of the houses there were decorated.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)