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mahabharat 1.217.15: तत्पश्चात् आवश्यक कार्य करके वह श्रीकृष्ण से प्रणाम करके उनके साथ सुवर्णमय रथ पर बैठकर द्वारकापुरी को चला गया॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.217: अर्जुनका प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णसे मिलना और उन्हींके साथ उनका रैवतक पर्वत एवं द्वारकापुरीमें आना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 217: अर्जुनका प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णसे मिलना और उन्हींके साथ उनका रैवतक पर्वत एवं द्वारकापुरीमें आना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.217.15 
स कृत्वावश्यकार्याणि वार्ष्णेयेनाभिनन्दित:।
रथेन काञ्चनाङ्गेन द्वारकामभिजग्मिवान्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् आवश्यक कार्य करके वह श्रीकृष्ण से प्रणाम करके उनके साथ सुवर्णमय रथ पर बैठकर द्वारकापुरी को चला गया॥15॥
 
After that, after doing the necessary work, he was greeted by Shri Krishna and sat on a golden chariot with him and went to Dwarkapuri. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)