Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.217.12: वहाँ सुन्दर शय्या पर शयन करते हुए महाबाहु धनंजय ने भगवान श्रीकृष्ण से अनेक तीर्थस्थानों, तालाबों, पर्वतों, नदियों और वनों में भ्रमण करने का अपना अनुभव विचित्र-अजीब बातें कहीं॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.217: अर्जुनका प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णसे मिलना और उन्हींके साथ उनका रैवतक पर्वत एवं द्वारकापुरीमें आना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततस्तत्र महाबाहु: शयान: शयने शुभे।
तीर्थानां पल्वलानां च पर्वतानां च दर्शनम्।
आपगानां वनानां च कथयामास सात्वते॥ १२॥
अनुवाद
वहाँ सुन्दर शय्या पर शयन करते हुए महाबाहु धनंजय ने भगवान श्रीकृष्ण से अनेक तीर्थस्थानों, तालाबों, पर्वतों, नदियों और वनों में भ्रमण करने का अपना अनुभव विचित्र-अजीब बातें कहीं॥12॥
There, the mighty-armed Dhananjay, sleeping on a beautiful bed, told Lord Krishna strange things about his experience of visiting many places of pilgrimage, ponds, mountains, rivers and forests. 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥