Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.216.8: ब्राह्मण ने कहा, "शत् और शतसहस्र ये सभी शब्द अनंत संख्या के सूचक हैं, किन्तु यहाँ मैंने जो 'शतं समाः' (आप सबको सौ वर्ष तक स्वीकार करना) कहा है, उसमें शत् शब्द केवल सौ वर्षों की मात्रा का सूचक है। यह अनंत काल का सूचक नहीं है। | mahabharat अध्याय 1.216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मण उवाच
शतं शतसहस्रं तु सर्वमक्षय्यवाचकम्।
परिमाणं शतं त्वेतन्नेदमक्षय्यवाचकम्॥ ८॥
अनुवाद
ब्राह्मण ने कहा, "शत् और शतसहस्र ये सभी शब्द अनंत संख्या के सूचक हैं, किन्तु यहाँ मैंने जो 'शतं समाः' (आप सबको सौ वर्ष तक स्वीकार करना) कहा है, उसमें शत् शब्द केवल सौ वर्षों की मात्रा का सूचक है। यह अनंत काल का सूचक नहीं है।
The Brahmin said, "The words 'Shat' and 'Shatasahasra' - all these indicate infinite numbers, but here what I have said 'Shatam Samah' (to accept you all for hundred years), in that the word Shat indicates the quantity of hundred years only. It does not indicate infinite time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥