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mahabharat 1.216.5: 'धर्म के ज्ञाता! ब्राह्मण को सब प्राणियों के प्रति मित्रवत कहा गया है। हे श्रेष्ठ पुरुष! बुद्धिमान पुरुषों का यह कथन सत्य होना चाहिए।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.216.5 
सर्वभूतेषु धर्मज्ञ मैत्रो ब्राह्मण उच्यते।
सत्यो भवतु कल्याण एष वादो मनीषिणाम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'धर्म के ज्ञाता! ब्राह्मण को सब प्राणियों के प्रति मित्रवत कहा गया है। हे श्रेष्ठ पुरुष! बुद्धिमान पुरुषों का यह कथन सत्य होना चाहिए।॥5॥
 
'Knower of religion! A Brahmin is said to be friendly towards all living beings. O noble person! This statement of wise men should be true.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)