Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.216.35: वह भगवान शंकर का मूल धाम है और उनके दर्शन मात्र से मोक्ष प्राप्त होता है। पापी मनुष्य भी वहाँ जाकर निर्भय गति को प्राप्त होता है ॥ 35॥ | mahabharat अध्याय 1.216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह भगवान शंकर का मूल धाम है और उनके दर्शन मात्र से मोक्ष प्राप्त होता है। पापी मनुष्य भी वहाँ जाकर निर्भय गति को प्राप्त होता है ॥ 35॥
That is the original abode of Lord Shankar and one can attain salvation merely by seeing him. Even a sinful man attains a fearless state by going there. ॥ 35॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वण्यर्जुनवनवासपर्वण्यर्जुनतीर्थयात्रायां षोडशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २१६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत अर्जुनवनवासपर्वमें अर्जुनकी तीर्थयात्रासे सम्बन्ध रखनेवाला दो सौ सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥