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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.216.34 
विप्रयोगेन संतापं मा कृथास्त्वमनिन्दिते।
चित्राङ्गदामेवमुक्त्वा गोकर्णमभितोऽगमत्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
"हे सती-साध्वी प्रिये! मेरे वियोग से दुःखी न हो।" चित्रांगदा से ऐसा कहकर अर्जुन गोकर्ण तीर्थ की ओर चल पड़े।
 
"O Sati-Sadhvi (dignified) dear one! Do not be distressed by my separation." Having said this to Chitrangada, Arjuna proceeded towards Gokarna Tirtha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)