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mahabharat 1.216.33: ‘यह धर्म से चित्रवाहन का पुत्र है; किन्तु शरीर पितरों को सुख पहुँचाने वाला है। अतः तुम पाण्डवों के इस प्रिय पुत्र का सदैव अनुसरण करो ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 1.216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.216.33 
चित्रवाहनदायादं धर्मात् पौरवनन्दनम्।
पाण्डवानां प्रियं पुत्रं तस्मात् पालय सर्वदा॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
‘यह धर्म से चित्रवाहन का पुत्र है; किन्तु शरीर पितरों को सुख पहुँचाने वाला है। अतः तुम पाण्डवों के इस प्रिय पुत्र का सदैव अनुसरण करो ॥33॥
 
‘He is the son of Chitravahana by religion; But the body will bring joy to the ancestors. Therefore, always follow this beloved son of Pandavas. 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)