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mahabharat 1.216.3: 'तपोधन! मेरी असली मृत्यु तो यही है कि मैं तुम जैसे शुद्धात्मा ऋषि को लुभाने के लिए यहाँ आया हूँ।   |   mahabharat अध्याय 1.216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.216.3 
एष एव वधोऽस्माकं सुपर्याप्तस्तपोधन।
यद् वयं संशितात्मानं प्रलोब्धुं त्वामिहागता:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'तपोधन! मेरी असली मृत्यु तो यही है कि मैं तुम जैसे शुद्धात्मा ऋषि को लुभाने के लिए यहाँ आया हूँ।
 
'Tapodhana! My only real death is that I came here to entice a pure souled sage like you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)