Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.216.26: तत्पश्चात् पाण्डुकुमार ने पुनः चित्रांगदास से कहा - 'प्रिये! तुम्हारा कल्याण हो। तुम यहीं रहो और बभ्रुवाहन का ध्यान रखो।' 26॥   |   mahabharat अध्याय 1.216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.216.26 
चित्राङ्गदां पुनर्वाक्यमब्रवीत् पाण्डुनन्दन:।
इह वै भव भद्रं ते वर्धेथा बभ्रुवाहनम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पाण्डुकुमार ने पुनः चित्रांगदास से कहा - 'प्रिये! तुम्हारा कल्याण हो। तुम यहीं रहो और बभ्रुवाहन का ध्यान रखो।' 26॥
 
After that Pandukumar again said to Chitrangadasa - 'Dear! May you be well. You stay here and take care of Babhruvahana. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)